
बिहार की राजनीति में कांग्रेस नेता राहुल गांधी का प्रस्तावित पटना दौरा अचानक स्थगित होने के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। यह दौरा सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं माना जा रहा था, बल्कि कांग्रेस की ओर से युवाओं और छात्रों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की बड़ी रणनीति का हिस्सा था। खासकर पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर राहुल गांधी सीधे छात्रों से संवाद करने वाले थे। लेकिन कार्यक्रम से ठीक पहले इसे रद्द कर दिए जाने के बाद अब इसके पीछे की असली वजहों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
- कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर इस फैसले के पीछे बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के कारण लागू आदर्श आचार संहिता और प्रशासनिक परिस्थितियों का हवाला दिया है। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महागठबंधन के भीतर बढ़ती खींचतान और बांकीपुर उपचुनाव में प्रत्याशी चयन को लेकर कांग्रेस और राजद के बीच मतभेद भी इस फैसले की बड़ी वजह हो सकते हैं।
11 से 15 जुलाई के बीच होना था राहुल गांधी का कार्यक्रम
- कांग्रेस ने राहुल गांधी के बिहार दौरे की तैयारी कई दिनों पहले शुरू कर दी थी। पार्टी की योजना थी कि राहुल गांधी 11 से 15 जुलाई के बीच पटना पहुंचकर पेपर लीक, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों पर छात्रों और युवाओं से सीधा संवाद करेंगे।
इस कार्यक्रम के लिए राजधानी पटना के बापू सभागार को बुक कराया गया था। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक करीब 36 हजार युवाओं ने इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन कराया था। पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच भी कार्यक्रम को लेकर उत्साह था और बड़े स्तर पर तैयारियां चल रही थीं।
- लेकिन अंतिम समय में कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया और बापू सभागार की बुकिंग भी रद्द कर दी गई।
पहले बुकिंग बढ़ी, फिर अचानक हुई रद्द
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस ने शुरुआत में 11 जुलाई के लिए बापू सभागार की बुकिंग कराई थी। बाद में इसे 11 से 13 जुलाई तक बढ़ाया गया और फिर 15 जुलाई तक कार्यक्रम की संभावनाओं को देखते हुए बुकिंग जारी रखी गई।
- हालांकि अंतिम समय में पूरी बुकिंग रद्द कर दी गई, जिससे राजनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।
कांग्रेस ने बताई आचार संहिता की वजह
- कांग्रेस के कार्यक्रम संयोजक अनुपम ने कहा कि बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के कारण संबंधित क्षेत्र में आदर्श आचार संहिता लागू है। ऐसे में प्रस्तावित कार्यक्रम को फिलहाल स्थगित किया गया है।
पार्टी का कहना है कि राहुल गांधी का कार्यक्रम पूरी तरह छात्रों और युवाओं के मुद्दों पर केंद्रित था। उनका उद्देश्य पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं और बेरोजगारी जैसे सवालों को लेकर युवाओं के बीच जाना था।
- हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि प्रशासन से आवश्यक अनुमति लेकर कार्यक्रम आयोजित किया जा सकता था। ऐसे में केवल आचार संहिता को वजह बताना पूरी तस्वीर नहीं माना जा रहा।
बांकीपुर उपचुनाव ने बढ़ाई सियासी दूरी
- राहुल गांधी के दौरे को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के संदर्भ में हो रही है।
दरअसल, कांग्रेस चाहती थी कि भाजपा के खिलाफ विपक्ष एकजुट होकर चुनाव लड़े। इसी रणनीति के तहत कांग्रेस के कुछ नेताओं ने जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर को समर्थन देने की बात कही थी।
- लेकिन राजद ने बिना किसी संयुक्त घोषणा के अपनी उम्मीदवार रेखा गुप्ता को मैदान में उतार दिया। इस फैसले के बाद कांग्रेस के भीतर नाराजगी की खबरें सामने आने लगीं।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि महागठबंधन के सहयोगी दलों से पर्याप्त चर्चा किए बिना उम्मीदवार घोषित कर दिया गया। इससे गठबंधन के भीतर समन्वय पर सवाल खड़े हुए।
क्या महागठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं?
- राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राहुल गांधी का पटना दौरा स्थगित होना केवल प्रशासनिक फैसला नहीं है। इसके पीछे महागठबंधन के भीतर चल रही राजनीतिक असहजता भी एक बड़ा कारण हो सकती है।
बांकीपुर उपचुनाव को लेकर कांग्रेस और राजद के बीच अलग-अलग रणनीति सामने आने के बाद दोनों दलों के रिश्तों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कांग्रेस जहां अपनी अलग राजनीतिक पहचान मजबूत करने की कोशिश कर रही है, वहीं राजद अपने पारंपरिक वोट बैंक और संगठनात्मक ताकत के भरोसे चुनावी रणनीति बना रहा है।
- ऐसे में दोनों दलों के बीच तालमेल को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
छात्रों के बीच जाने की थी राहुल गांधी की तैयारी
- कांग्रेस का दावा है कि राहुल गांधी का कार्यक्रम पूरी तरह छात्र हितों पर आधारित था। वे पटना की सड़कों पर युवाओं के साथ संवाद करते, प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं और रोजगार जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरते।
पार्टी का मानना था कि इससे युवाओं के बीच कांग्रेस की पकड़ मजबूत होगी और आगामी विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को नई ऊर्जा मिलेगी।
- लेकिन जिस इलाके में राहुल गांधी का प्रस्तावित कार्यक्रम होना था, उसका बड़ा हिस्सा बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में आता है। यही कारण बताया जा रहा है कि कार्यक्रम को चुनावी गतिविधि के रूप में भी देखा जा सकता था।
बिहार कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति भी बनी चर्चा का विषय
- राहुल गांधी के दौरे के स्थगित होने के साथ ही बिहार कांग्रेस की आंतरिक स्थिति भी एक बार फिर चर्चा में आ गई है।
विधानसभा चुनाव बीत जाने के बाद भी पार्टी विधानसभा में अपना नेता प्रतिपक्ष या विधायक दल का नेता तय नहीं कर सकी है। प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, पूर्व विधायक दल के नेता शकील अहमद खान और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह के बीच नेतृत्व को लेकर मतभेद की चर्चाएं लगातार सामने आती रही हैं।
- राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संगठन के भीतर जारी यह असमंजस भी पार्टी के बड़े कार्यक्रमों को प्रभावित कर रहा है।
बिहार में कांग्रेस के लिए क्यों अहम था यह दौरा?
- राहुल गांधी का यह दौरा सिर्फ छात्रों से संवाद का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि बिहार में कांग्रेस के जनाधार को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा था।
लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस बिहार में युवाओं, छात्रों और नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के बीच अपनी राजनीतिक मौजूदगी बढ़ाना चाहती है। पेपर लीक और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर पार्टी सरकार को घेरने की तैयारी में थी।
- अगर यह कार्यक्रम होता तो इसका सीधा राजनीतिक संदेश आगामी विधानसभा चुनाव तक जाता।
अब आगे क्या?
फिलहाल कांग्रेस ने कार्यक्रम को रद्द नहीं बल्कि स्थगित बताया है। पार्टी की ओर से संकेत दिए गए हैं कि उपयुक्त समय पर राहुल गांधी का बिहार दौरा दोबारा तय किया जाएगा।
हालांकि राजनीतिक गलियारों में चर्चा इस बात की ज्यादा है कि क्या कांग्रेस और राजद के बीच बढ़ती दूरी को समय रहते दूर किया जा सकेगा। बांकीपुर उपचुनाव, गठबंधन की रणनीति और कांग्रेस की अंदरूनी चुनौतियां आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति की दिशा तय कर सकती हैं।
राहुल गांधी का पटना दौरा फिलहाल भले ही टल गया हो, लेकिन इससे उठे राजनीतिक सवाल आने वाले समय में महागठबंधन की एकजुटता और बिहार में कांग्रेस की रणनीति की बड़ी परीक्षा जरूर लेने वाले हैं।
