
पटना: बिहार की सबसे चर्चित विधानसभा सीटों में शामिल बांकीपुर उपचुनाव का राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार अभिषेक कुमार उर्फ बंटी ने नामांकन दाखिल करने से पहले अपने माता-पिता का आशीर्वाद लेकर चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत की। घर से निकलने से पहले उन्होंने अपनी मां के चरण स्पर्श किए और पिता से आशीर्वाद लिया। इसके बाद उन्होंने महावीर मंदिर में पूजा-अर्चना की और फिर गांधी मैदान स्थित समाहरणालय पहुंचकर बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया।
- भाजपा और एनडीए ने इस पूरे कार्यक्रम को शक्ति प्रदर्शन का रूप दिया। नामांकन के दौरान बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता, समर्थक और गठबंधन के वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। इसके बाद एक जनसभा का भी आयोजन किया गया, जिसमें चुनावी रणनीति और बांकीपुर सीट पर जीत का संदेश दिया गया।
माता-पिता का आशीर्वाद लेकर शुरू किया चुनावी सफर
नामांकन के लिए रवाना होने से पहले अभिषेक कुमार ने अपने घर पर माता-पिता का आशीर्वाद लिया। उन्होंने अपनी मां के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त किया और पिता से भी शुभकामनाएं लीं।
- इस दौरान उन्होंने कहा कि माता-पिता का आशीर्वाद ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। उनका विश्वास और समर्थन उन्हें जनता की सेवा के लिए प्रेरित करता है।
सोशल मीडिया पर साझा किया भावुक संदेश
- नामांकन से पहले अभिषेक कुमार ने सोशल मीडिया मंच X पर भी एक भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा,
“नामांकन करने से पूर्व सर्वप्रथम जन्मदाता माताजी एवं पिताजी को प्रणाम कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। आप दोनों के त्याग, साथ और समर्थन के लिए सदैव ऋणी रहूँगा।”
- उनकी इस पोस्ट को भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने व्यापक रूप से साझा किया।
महावीर मंदिर में पूजा के बाद दाखिल किया नामांकन
घर से निकलने के बाद अभिषेक कुमार सबसे पहले पटना के प्रसिद्ध महावीर मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने पूजा-अर्चना कर जीत का आशीर्वाद मांगा। इसके बाद वे समर्थकों के साथ गांधी मैदान स्थित समाहरणालय पहुंचे और बांकीपुर विधानसभा सीट के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया।
- नामांकन प्रक्रिया के दौरान प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे और बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी।
NDA ने दिखाया शक्ति प्रदर्शन
अभिषेक कुमार के नामांकन कार्यक्रम को भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने शक्ति प्रदर्शन के रूप में आयोजित किया। कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री Samrat Choudhary, सांसद Ravi Shankar Prasad सहित एनडीए के कई वरिष्ठ नेता, विधायक और हजारों कार्यकर्ता शामिल हुए।
- नामांकन के बाद आयोजित सभा में नेताओं ने भाजपा की उपलब्धियों को जनता के सामने रखा और बांकीपुर सीट पर एक बार फिर जीत का दावा किया।
क्यों हो रहा है बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव?
बांकीपुर विधानसभा सीट पर यह उपचुनाव भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक Nitin Nabin के राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद कराया जा रहा है। राज्यसभा जाने के कारण उन्होंने विधानसभा की सदस्यता छोड़ दी, जिससे यह सीट रिक्त हो गई।
- निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार नामांकन की प्रक्रिया 13 जुलाई तक चलेगी। 30 जुलाई को मतदान होगा, जबकि 3 अगस्त को मतगणना के बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे।
भाजपा का मजबूत गढ़ रही है बांकीपुर सीट
बांकीपुर विधानसभा सीट लंबे समय से भाजपा का मजबूत राजनीतिक गढ़ मानी जाती है। वर्ष 1995 से इस सीट पर भाजपा का लगातार कब्जा बना हुआ है।
सबसे पहले इस सीट का प्रतिनिधित्व नवीन प्रसाद ने किया था। उनके निधन के बाद वर्ष 2006 से नितिन नवीन लगातार इस सीट से चुनाव जीतते रहे और भाजपा की मजबूत पकड़ बनाए रखी। यही वजह है कि पार्टी इस उपचुनाव को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़कर देख रही है।
- मुकाबले में राजद और जन सुराज भी
भाजपा के सामने इस बार विपक्ष ने भी पूरी ताकत झोंक दी है।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने रेखा कुमारी गुप्ता को अपना उम्मीदवार बनाया है। उन्होंने भी गुरुवार को अपना नामांकन दाखिल किया।
- वहीं, जन सुराज के संस्थापक Prashant Kishor 11 जुलाई को अपना नामांकन दाखिल करेंगे। जन सुराज की सक्रियता के कारण इस बार मुकाबला पहले की तुलना में अधिक दिलचस्प माना जा रहा है।
चुनावी सरगर्मी तेज
नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में चुनावी गतिविधियां तेज हो गई हैं। सभी प्रमुख राजनीतिक दल जनसंपर्क अभियान, नुक्कड़ सभाओं और कार्यकर्ता बैठकों के जरिए मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
भाजपा जहां इस सीट पर अपना लगातार जीत का रिकॉर्ड कायम रखना चाहती है, वहीं राजद और जन सुराज इस चुनाव को सत्तारूढ़ गठबंधन के खिलाफ जनमत के रूप में पेश करने की तैयारी में हैं।
क्या होगा चुनावी समीकरण?
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव केवल एक सीट का चुनाव नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे बिहार की आगामी राजनीतिक दिशा और दलों की संगठनात्मक ताकत की परीक्षा के रूप में भी देखा जा रहा है। भाजपा इस सीट पर अपनी परंपरागत बढ़त बरकरार रखने की कोशिश करेगी, जबकि विपक्ष इसे प्रतिष्ठा की लड़ाई बनाकर मैदान में उतरा है।
अब सभी की निगाहें नामांकन प्रक्रिया पूरी होने, चुनाव प्रचार के अगले चरण और 30 जुलाई को होने वाले मतदान पर टिकी हैं। 3 अगस्त को मतगणना के बाद यह साफ हो जाएगा कि बांकीपुर का राजनीतिक किला किसके कब्जे में रहता है।
