
बांग्लादेश ने भारत को आधिकारिक पत्र लिखकर अपनी पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को फांसी की सजा के बाद भारत से वापस भेजने का अनुरोध किया है। बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) ने हसीना को जुलाई-ऑगस्ट 2024 में हुए विद्रोह के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई है। हसीना वर्तमान में भारत में निर्वासन में हैं और बांग्लादेश का कहना है कि भारत के साथ मौजूदा प्रत्यर्पण संधि के तहत भारत की बाध्यकारी जिम्मेदारी है कि वह हसीना को वापस भेजे।
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने भारत सरकार को लिखा है कि हसीना और उनके एक सहयोगी असदुज्जामान खान कमाल दोनों को तुरंत बांग्लादेश के सामने न्यायिक प्रक्रिया के लिए सौंपा जाना चाहिए। पत्र में यह भी कहा गया है कि भारत द्वारा उन्हें आश्रय देना बांग्लादेश के प्रति एक अनुकूल व्यवहार नहीं होगा और न्याय के अपमान के समान है। बांग्लादेश की ओर से दिसंबर 2024 में भी भारत को प्रत्यर्पण के लिए अनुरोध किया गया था, लेकिन अब ये मामला और भी तगड़ा हो गया है।
शेख हसीना ने इस फैसले को राजनीतिक प्रेरित और पक्षपाती बताया है और इसे “जोखिमपूर्ण और चरमपंथी” विधायकों की साजिश करार दिया है। भारत की विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश के पत्र की पुष्टि की है लेकिन फिलहाल इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है। भारत के लिए यह मामला एक संवेदनशील राजनीतिक और कानूनी मुद्दा बन गया है, जिसमें न्यायिक प्रक्रिया, द्विपक्षीय संबंध और राजनीतिक असर को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना होगा।
शेख हसीना के खिलाफ जांच और आरोपों की पूरी समयरेखा इस प्रकार है:
- अगस्त 2024: बांग्लादेश में छात्र-नेतृत्व वाले बड़े विरोध प्रदर्शन शुरू हुए, जो सरकारी नौकरियों में भेदभावकारी कोटा प्रणाली के खिलाफ थे। इसी दौरान हिंसक झड़पें हुईं।
- अगस्त 5, 2024: हसीना सत्ता से हटाई गईं और वह भारत में निर्वासन में चली गईं।
- अक्टूबर 2024: अंतरिम सरकार ने बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT-BD) का पुनर्गठन किया। इस महीने ICT ने हसीना और अन्य 45 नेताओं के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए।
- नवंबर 2024: जांच पूरी करने का निर्देश दिया गया, और संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में बताया गया कि लगभग 1,400 लोग विरोध प्रदर्शन के दौरान मारे गए थे।
- 1 जून 2025: मुकदमा औपचारिक रूप से शुरू हुआ। अभियोजन पक्ष ने कहा कि हसीना की सरकार ने छात्रों और नागरिकों पर संगठित और प्रणालीगत हिंसा की।
- 2 जुलाई 2025: हसीना को अदालत की अवमानना का दोषी पाया गया और छह महीने की कैद की सजा सुनाई गई।
- 10 जुलाई 2025: हसीना पर अपराध मानवता के पांच आरोप लगाए गए, जिनमें भीड़ पर हेलीकॉप्टर और ड्रोन से हमला, छात्रों की हत्या, और साक्ष्य नष्ट करने के लिए शवों का जलाना शामिल हैं।
- अगस्त 2025: मुकदमे की सुनवाई पूरी हुई और 13 नवंबर 2025 को फैसला सुनाने के लिए तारीख तय की गई।
- 17 नवंबर 2025: ICT ने हसीना को दोषी ठहराकर उनकी मौत की सजा सुनाई। आरोपों में सशस्त्र बलों द्वारा छात्रों की हत्या, ड्रोन और हेलीकॉप्टर के माध्यम से हमले का आदेश शामिल थे।
इस मुकदमे में 203 आरोपियों में हसीना और उनके प्रमुख सहयोगी शामिल थे, और सभी को विभिन्न सजाएं सुनाई गईं। हसीना ने इस मुकदमे को राजनीतिक साजिश बताया है।
शेख हसीना के खिलाफ निर्णायक सबूत और गवाह निम्नलिखित रहे:
सबूत:
- ट्रिब्यूनल के पास 14 वॉल्यूम्स में लगभग 10,000 पेज के दस्तावेज थे, जिनमें सरकारी रिपोर्ट, ड्रोन और हेलीकॉप्टर के उड़ान लॉग, अस्पताल के रिकॉर्ड, कैमरे की फुटेज, और लीक हुए सरकारी संचार शामिल थे।
- अभियोजन पक्ष ने धारा 144 के तहत विरोध प्रदर्शनों पर किये गए हमलों के वीडियो और ऑडियो साक्ष्य प्रस्तुत किये।
- ड्रोन और हेलीकॉप्टर से नागरिकों पर गोलीबारी के आदेशों के सबूत।
- शवों के जला दिए जाने के लिए फोरेंसिक रिपोर्ट।
- प्रदर्शनकारियों को अस्पताल में इलाज से रोकने के आदेशों के ऑडियो रिकॉर्डिंग सम्बन्धी सबूत।
गवाह:
- खोखोन चंद्र बर्मन, जो दक्षिण ढाका के जतराबाड़ी क्षेत्र में हुए पुलिस कडैकाऊ में गाल में गोली लगने का जीवित साक्षी था, जिसने शेख हसीना और वरिष्ठ अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया।
- अब्दुल्लाह अल ईमरान, जो उनको अस्पताल में इलाज नहीं दिए जाने का साक्षी है।
- पूर्व पुलिस महानिदेशक चौधरी अब्दुल्लाह अल ममून, जो दोषी ठहराए गए और स्टेट गवाह बनकर साक्ष्य पेश किए।
- कुल लगभग 84 गवाहों के बयान लिए गए, जिनमें चिकित्सा कर्मचारी, पत्रकार, प्रदर्शनकारी, और पूर्व सुरक्षा अधिकारी शामिल थे।
इन्हीं सबूत और गवाहों के आधार पर अदालत ने शेख हसीना को तीन गंभीर आरोपों में दोषी ठहराया और उन्हें मृत्युदंड दिया। इस मुकदमे में हसीना की ओर से कोई गवाह या बचाव प्रस्तुत नहीं किया गया था।
