
19 सितंबर 2025 को राष्ट्रपति ट्रंप ने एक प्रोक्लेमेशन (घोषणा) साइन की, जो H-1B प्रोग्राम में बड़ा बदलाव लाती है। मुख्य बदलाव नई H-1B आवेदनों पर $100,000 (करीब 88 लाख रुपये) की वार्षिक फीस। यह फीस एम्प्लॉयर (कंपनी) को चुकानी होगी।
H-1B वीजा क्या है? : H-1B वीजा अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम का एक नॉन-इमिग्रेंट वीजा है, जो अमेरिकी कंपनियों को विदेशी वर्कर्स को “स्पेशलाइज्ड ऑक्यूपेशंस” (विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों) में हायर करने की अनुमति देता है। यह प्रोग्राम 1990 में शुरू हुआ था, जब टेक बूम के दौरान अमेरिका को कुशल टैलेंट की कमी महसूस हुई।मुख्य विशेषताएँ:योग्यता: आवेदक को कम से कम बैचलर डिग्री (या समकक्ष अनुभव) होनी चाहिए। जॉब में कम से कम 50% काम थ्योरी और प्रैक्टिकल नॉलेज पर आधारित होना चाहिए।
क्षेत्र: मुख्य रूप से आईटी, इंजीनियरिंग, मेडिसिन, रिसर्च, फाइनेंस, आर्किटेक्चर आदि। फैशन मॉडल्स और कुछ युद्ध-संबंधी प्रोजेक्ट्स के लिए भी लागू।
अवधि: शुरू में 3 साल के लिए, जो 3 साल और बढ़ाई जा सकती है (कुल 6 साल)। अगर ग्रीन कार्ड प्रक्रिया चल रही है, तो एक्सटेंशन मिल सकता है।
कैसे काम करता है?: अमेरिकी एम्प्लॉयर USCIS (यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज) में फॉर्म I-129 दाखिल करता है।
पहले इलेक्ट्रॉनिक रजिस्ट्रेशन होता है (मार्च में), फिर लॉटरी सिस्टम से सिलेक्शन।
वीजा मिलने पर, विदेश में यूएस एंबेसी से स्टैंप लगवाना पड़ता है।
H-1B अमेरिकी इकोनॉमी को मजबूत करता है – H-1B वर्कर्स इनोवेशन बढ़ाते हैं, लेकिन कुछ आलोचक कहते हैं कि यह अमेरिकी वर्कर्स को नुकसान पहुँचाता है।2. ट्रंप का नया नियम क्या है?19 सितंबर 2025 को राष्ट्रपति ट्रंप ने एक प्रोक्लेमेशन (घोषणा) साइन की, जो H-1B प्रोग्राम में बड़ा बदलाव लाती है।
परिवार: H-4 वीजा पर पति/पत्नी और 21 साल से कम उम्र के बच्चे आ सकते हैं। H-4 पर कुछ मामलों में काम की अनुमति भी मिलती है।
कैप (सीमा): हर फिस्कल ईयर (अक्टूबर से सितंबर) में सिर्फ 65,000 रेगुलर + 20,000 मास्टर्स डिग्री वालों के लिए (कुल 85,000)। FY 2024 में लगभग 4 लाख एप्लीकेशन्स अप्रूव हुईं, ज्यादातर रिन्यूअल।
भारत पर प्रभाव: भारत से 70-75% H-1B वीजा मिलते हैं। अमेज़न, माइक्रोसॉफ्ट, गूगल जैसी कंपनियाँ हजारों भारतीय इंजीनियर्स हायर करती हैं। 2025 की पहली छमाही में अमेज़न को 12,000+, माइक्रोसॉफ्ट को 5,000+ अप्रूवल मिले।
नई बदलाव H-1B आवेदनों पर $100,000 (करीब 88 लाख रुपये) की वार्षिक फीस। यह फीस एम्प्लॉयर (कंपनी) को चुकानी होगी।कब लागू? 21 सितंबर 2025 से (रविवार सुबह 12:01 बजे ईटी)। यह नियम 12 महीने (21 सितंबर 2026 तक) चलेगा, जब तक एक्सटेंड न हो।
किस पर लागू? केवल नई आवेदन: फरवरी 2026 लॉटरी में शामिल होने वाले नए अप्लिकेंट्स पर, जो अभी अमेरिका के बाहर हैं।
किस पर नहीं लागू: मौजूदा H-1B होल्डर्स (ट्रैवल या री-एंट्री पर कोई असर नहीं)।
रिन्यूअल (एक्सटेंशन)।
2025 लॉटरी के विनर्स।
अगर पेटिशन के साथ $100,000 पेमेंट नहीं, तो USCIS रिजेक्ट कर सकता है।
उद्देश्य: ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन का कहना है कि यह अमेरिकी वर्कर्स को प्रोटेक्ट करेगा। हाल के डेटा से कंप्यूटर जॉब्स में बेरोजगारी 1.98% से बढ़कर 3.02% हो गई। कई टेक कंपनियाँ (जैसे एक सॉफ्टवेयर फर्म ने 15,000 अमेरिकी लेऑफ किए लेकिन 5,000 H-1B अप्रूव कराए) अमेरिकन्स को ट्रेन करने की बजाय विदेशियों को हायर कर रही हैं। कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लुटनिक ने कहा, “ट्रेन अमेरिकन्स” (अमेरिकियों को ट्रेनिंग दो)।
अन्य बदलाव: एक नया “ट्रंप गोल्ड कार्ड” वीजा: $1 मिलियन ($10 करोड़) पेमेंट पर वेल्थी फॉरेनर्स को वीजा, या एम्प्लॉयर $2 मिलियन पे। “प्लेटिनम कार्ड” ($5 मिलियन) भी प्लान में, लेकिन कांग्रेस अप्रूवल जरूरी।
H-1B को हाई-पेइंग जॉब्स प्राथमिकता: लॉटरी सिस्टम बदलने की कोशिश, हाई सैलरी वालों को फेवर।
इस नियम का प्रभाव क्या होगा?
टेक इंडस्ट्री पर: बड़ा झटका। Microsoft, Google, Amazon , मेटा जैसी कंपनियाँ अब हायरिंग रुकवा सकती हैं। 2025 में ये कंपनियाँ हजारों H-1B पर निर्भर हैं। छोटी कंपनियाँ तो प्रभावित होंगी ही।
भारतीय प्रोफेशनल्स पर:
भारत सबसे ज्यादा प्रभावित (70%+ वीजा)। IT सेक्टर में जॉब्स कम हो सकती हैं, फैमिली स्प्लिट हो सकती हैं। पीएम मोदी ने 21 सितंबर को राष्ट्र को संबोधित करने की बात कही, शायद इस पर चर्चा।
अमेरिकी इकोनॉमी:
शॉर्टेज हो सकता है – पैंडेमिक में इमिग्रेशन स्लो होने पर जॉब ओपनिंग्स रिकॉर्ड हाई पहुँचीं।
लेकिन ट्रंप का दावा: अमेरिकी वर्कर्स को फायदा।
