
बिहार के लिए ऊर्जा क्षेत्र से एक बड़ी और गौरवपूर्ण खबर सामने आई है। NTPC Limited की NTPC Barh Super Thermal Power Station परियोजना ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए देश के ऊर्जा क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान और भी सशक्त कर ली है। रिकॉर्ड विद्युत उत्पादन के साथ यह पावर स्टेशन अब एनटीपीसी का दूसरा सबसे बड़ा पावर स्टेशन बन गया है।
- इस बड़ी उपलब्धि की जानकारी सोमवार, 18 मई 2026 को परियोजना परिसर में आयोजित एक विशेष मीडिया संवाद कार्यक्रम में दी गई। इस दौरान परियोजना प्रमुख सी. सत्य रामकृष्ण ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि एनटीपीसी बाढ़ परियोजना ने इस वर्ष 17,574 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह अब तक का सबसे अधिक वार्षिक उत्पादन है, जिसने परियोजना के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।
3300 मेगावाट क्षमता से बनी ऊर्जा की महाशक्ति
एनटीपीसी बाढ़ परियोजना की कुल स्थापित क्षमता 3300 मेगावाट है, जिसमें 660 मेगावाट की पांच इकाइयां शामिल हैं। यह परियोजना बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश के बड़े ताप विद्युत केंद्रों में गिनी जाती है।
- प्रबंधन के अनुसार, स्टेज-I की यूनिट-3 के वाणिज्यिक संचालन शुरू होने के बाद उत्पादन क्षमता और परिचालन दक्षता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला। इसका असर सीधे बिजली उत्पादन पर पड़ा और वित्तीय वर्ष 2025-26 में परियोजना ने रिकॉर्ड उत्पादन दर्ज किया।
एक दिन और एक महीने में भी बना नया रिकॉर्ड
एनटीपीसी बाढ़ ने केवल वार्षिक उत्पादन में ही नहीं, बल्कि दैनिक और मासिक उत्पादन में भी नए रिकॉर्ड स्थापित किए हैं। 30 दिसंबर 2025 को परियोजना ने एक ही दिन में 75.38 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन कर नया रिकॉर्ड बनाया।
- वहीं, मार्च 2026 में 2,045 मिलियन यूनिट का मासिक उत्पादन दर्ज किया गया, जो इस पावर स्टेशन की स्थिरता और तकनीकी मजबूती को दर्शाता है।
- परियोजना का प्लांट लोड फैक्टर (PLF) 95.18 प्रतिशत दर्ज किया गया है, जिसे ऊर्जा क्षेत्र में अत्यंत उत्कृष्ट प्रदर्शन माना जाता है। यह आंकड़ा बताता है कि पावर स्टेशन अपनी कुल क्षमता का लगभग पूरा उपयोग करते हुए लगातार बिजली उत्पादन कर रहा है।
हरित ऊर्जा की दिशा में भी तेज कदम
- एनटीपीसी बाढ़ केवल ताप विद्युत उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि हरित ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।
परियोजना परिसर में कुल 3,150 किलोवाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की जा रही हैं। इनमें से 2,450 किलोवाट क्षमता का कार्य पहले ही पूरा किया जा चुका है।
- इसके अलावा भविष्य की ऊर्जा जरूरतों और ग्रिड स्थिरता को ध्यान में रखते हुए 400 MWh क्षमता वाली बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) परियोजना पर भी तेजी से काम चल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक भविष्य में ऊर्जा प्रबंधन को अधिक प्रभावी और विश्वसनीय बनाएगी।
स्थानीय विकास और सामाजिक जिम्मेदारी पर भी फोकस
- एनटीपीसी लिमिटेड केवल बिजली उत्पादन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक दायित्व के तहत आसपास के क्षेत्रों में कई जनकल्याणकारी योजनाएं भी चला रही है।
कंपनी की ओर से बालिका सशक्तिकरण अभियान, उत्कर्ष मेरिट छात्रवृत्ति योजना और मोबाइल मेडिकल वैन जैसी सुविधाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य स्थानीय समुदाय के शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास को मजबूत करना है।
- स्थानीय लोगों का कहना है कि एनटीपीसी की इन पहलों से आसपास के गांवों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है और रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।
मीडिया संवाद में भविष्य की योजनाओं पर चर्चा
- मीडिया संवाद कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों और एनटीपीसी प्रबंधन के बीच परियोजना की तकनीकी उपलब्धियों, भविष्य की विस्तार योजनाओं और सामाजिक योगदान को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।
- प्रबंधन ने कहा कि मीडिया का सहयोग परियोजना की पारदर्शिता और विकास यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। साथ ही आने वाले वर्षों में उत्पादन क्षमता और हरित ऊर्जा क्षेत्र में और बड़े निवेश की भी योजना बनाई जा रही है।
ऊर्जा क्षेत्र में बिहार की बढ़ती ताकत
एनटीपीसी बाढ़ की यह उपलब्धि बिहार के लिए भी बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। लंबे समय तक बिजली संकट से जूझने वाले राज्य में अब बड़े स्तर पर ऊर्जा उत्पादन हो रहा है। इससे न केवल बिहार बल्कि देश के कई हिस्सों को भी बिजली आपूर्ति में मजबूती मिलेगी।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तरह से एनटीपीसी बाढ़ ने उत्पादन, तकनीक और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में संतुलित विकास किया है, वह आने वाले समय में देश के अन्य पावर स्टेशनों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है।
