
पटना/लखीसराय: देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। पेपर लीक प्रकरण के बाद आयोजित री-एग्जाम के दौरान बिहार के लखीसराय जिले में पुलिस ने एक ऐसे संगठित सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़ किया है, जिसने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस कार्रवाई में मेडिकल कॉलेजों के छात्रों सहित कुल 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
- पुलिस जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने असली अभ्यर्थियों की जगह दूसरे लोगों को परीक्षा में बैठाने के लिए 30 से 40 लाख रुपये तक की मोटी रकम वसूली थी। इस नेटवर्क में देश के प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों के छात्र कथित तौर पर सॉल्वर बनकर शामिल थे, जो अभ्यर्थियों के स्थान पर परीक्षा देने पहुंचे थे।
मेडिकल छात्रों की भूमिका से बढ़ी चिंता
गिरफ्तार आरोपियों में पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (PMCH), गया मेडिकल कॉलेज, AIIMS रायबरेली तथा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के मेडिकल छात्रों के नाम सामने आए हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि मेडिकल शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों का इस तरह के संगठित परीक्षा फर्जीवाड़े में शामिल होना बेहद गंभीर मामला है।
- पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इन छात्रों को परीक्षा देने के बदले लाखों रुपये का लालच दिया गया था। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि पूरे नेटवर्क को सुनियोजित तरीके से संचालित किया जा रहा था और इसमें कई स्तरों पर लोगों की भूमिका तय थी।
बायोमेट्रिक सिस्टम में सेंध, 14 कर्मचारी गिरफ्तार
मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों की पहचान सत्यापित करने के लिए तैनात बायोमेट्रिक कंपनी के 14 कर्मचारी भी इस कथित नेटवर्क का हिस्सा पाए गए हैं। आरोप है कि इन कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जी अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्रों में प्रवेश दिलाने की योजना बनाई गई थी।
- जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणाली में तैनात कर्मचारी ही नियमों को दरकिनार करने लगें, तो परीक्षा की पारदर्शिता पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
तीन परीक्षा केंद्रों पर छापेमारी
- पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर लखीसराय के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर एक साथ कार्रवाई की। छापेमारी के दौरान राजकीय उच्च विद्यालय हसनपुर, केआरके हायर सेकेंडरी स्कूल और केंद्रीय विद्यालय परीक्षा केंद्रों से कई संदिग्धों को हिरासत में लिया गया।
- पूछताछ और दस्तावेजों की जांच के बाद कुल 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपियों के पास से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और पहचान संबंधी सामग्री भी बरामद की है, जिनकी जांच की जा रही है।
PMCH छात्र मयंक कश्यप की भूमिका आई सामने
- जांच के दौरान हाजीपुर निवासी और PMCH के छात्र मयंक कश्यप का नाम प्रमुखता से सामने आया। पुलिस के अनुसार, वह कथित रूप से बायोमेट्रिक कंपनी के कर्मचारी के रूप में फर्जी पहचान बनाकर परीक्षा केंद्र में प्रवेश कर गया था।
- हालांकि पुलिस को पहले से मिली सूचना के आधार पर उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी और मौके पर ही उसे पकड़ लिया गया। इसके बाद हुई पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आईं, जिसके आधार पर पूरे नेटवर्क तक पहुंचने में मदद मिली।
पेपर लीक मामले से जुड़े तार?
- पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कथित तौर पर अर्पित राज नामक व्यक्ति का जिक्र किया है। अर्पित राज का नाम इससे पहले भी NEET पेपर लीक मामले में सामने आ चुका है और उससे केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) पूछताछ कर चुकी है।
- पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या वर्तमान सॉल्वर गैंग और पूर्व के पेपर लीक नेटवर्क के बीच कोई सीधा संबंध है। अधिकारियों का मानना है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय हो सकता है और इसके तार कई राज्यों तक फैले हो सकते हैं।
रोकथाम के प्रयास भी नहीं आए काम
गौरतलब है कि मेडिकल छात्रों को परीक्षा में शामिल होने से रोकने और निगरानी बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल कॉलेजों में विशेष सेमिनार, जागरूकता कार्यक्रम और क्विज प्रतियोगिताओं का आयोजन कराया था। इसके बावजूद कुछ छात्र कथित तौर पर सॉल्वर बनकर परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने में सफल रहे।
- इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि परीक्षा संचालन में अपनाई जा रही सुरक्षा व्यवस्थाएं कितनी प्रभावी हैं और उन्हें और मजबूत बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए।
जांच जारी, पूरे नेटवर्क की तलाश
पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है। मोबाइल फोन, बैंक खातों और डिजिटल लेन-देन की जांच के जरिए पूरे नेटवर्क का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। आशंका है कि इस गिरोह में और भी लोग शामिल हो सकते हैं, जिनकी पहचान की जा रही है।
NEET-UG 2026 री-एग्जाम में सामने आया यह मामला केवल एक परीक्षा घोटाले का नहीं, बल्कि देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं में से एक की विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन गया है। अब सभी की नजरें पुलिस और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं, जो इस पूरे नेटवर्क के पीछे छिपे चेहरों को बेनकाब कर सकती हैं।
