
नवरात्र के पावन अवसर पर मुरारी स्वामी ने अपनी अनूठी भक्ति और आस्था से लोगों का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने राधे-कृष्ण मंदिर से मां दुर्गा के दरबार तक दंडवत परिक्रमा कर माता रानी के सामने अपनी अर्जी लगाई। धार्मिक आस्था से जुड़ी इस यात्रा के दौरान उनकी श्रद्धा और समर्पण की चर्चा होती रही।
नवरात्र के दौरान मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के लिए मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए माता रानी की आराधना कर रहे हैं। इसी क्रम में मुरारी स्वामी ने दंडवत परिक्रमा का मार्ग अपनाया। इस परिक्रमा में भक्त जमीन पर लेटकर दंडवत प्रणाम करते हुए आगे बढ़ते हैं। इसे आस्था, तपस्या और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।
मुरारी स्वामी ने राधे-कृष्ण मंदिर से अपनी यात्रा शुरू की और मां दुर्गा के दरबार तक पहुंचकर पूजा-अर्चना की। नवरात्र के माहौल में उनकी इस धार्मिक गतिविधि ने लोगों के बीच चर्चा बटोरी। श्रद्धालुओं के लिए यह अवसर भक्ति और विश्वास की भावना से जुड़ा रहा।
नवरात्र का पर्व शक्ति की उपासना और आध्यात्मिक साधना का प्रतीक है। इन दिनों भक्त अलग-अलग तरीकों से मां दुर्गा की आराधना करते हैं और अपनी मनोकामनाएं लेकर माता के दरबार पहुंचते हैं। मुरारी स्वामी की दंडवत परिक्रमा भी इसी धार्मिक आस्था और समर्पण की एक झलक पेश करती है।
