नीतीश कुमार ने 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, और पटना का ऐतिहासिक गांधी मैदान एक बार फिर से उनकी ऐतिहासिक राजनीति का साक्षी बना। बुधवार, 19 नवंबर 2025 की सुबह यह भव्य आयोजन हुआ, जिसमें देशभर की निगाहें बिहार और नीतीश कुमार पर टिकी रहीं। यह क्षण सिर्फ एक शपथ ग्रहण नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति के नए अध्याय का आरंभ था।
गांधी मैदान में इतिहास का गवाह
गांधी मैदान दुल्हन की तरह सजा हुआ था – हर तरफ बैनर, पोस्टर, रंग-बिरंगी लाइटों के बीच हजारों लोगों की भीड़ से पटना जीवंत दिख रहा था। सुरक्षा भी अभूतपूर्व थी। मंच के सामने नेताओं, गणमान्य लोगों, प्रशासनिक अफसरों व मीडिया का हुजूम उमड़ा। इस बार की खास बात थी – मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा, कई केंद्रीय मंत्री, 11 राज्यों के मुख्यमंत्री, और तमाम बड़े नेता मौजूद रहे।
एनडीए की प्रचंड जीत और बदलता समीकरण
हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन ने ज़बरदस्त जीत दर्ज की – कुल 202 सीटें एनडीए ने हासिल की, जबकि महागठबंधन सिर्फ 35 सीटों पर सिमट गया। यह जीत एनडीए के लिए संजीवनी साबित हुई और एक बार फिर ‘सुसाशन बाबू’ कहलाने वाले नीतीश कुमार के नेतृत्व पर मुहर लग गई।
शपथ ग्रहण का पल: मंच, भीड़ और लोगो के जज़्बात
सुबह 11.30 बजे जैसे ही कार्यक्रम शुरू हुआ, पटना की फिज़ा में बदलाव महसूस होने लगा। मंच पर हर किसी की नजरें थीं नीतीश कुमार पर — 74 वर्षीय ‘आयरन मैन ऑफ़ बिहार’ जिन्हें राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। जैसे ही नीतीश ने मंच पर पहुंच कर शपथ ली, तालियों की गड़गड़ाहट और नारेबाजी से श्रीगणेश हुआ बिहार में नई सरकार का।
प्रधानमंत्री का ‘गमछा लहराना’ और राजनीतिक प्रतीक
शपथ के बाद पीएम मोदी ने जनता का अभिवादन करते हुए ‘गमछा लहराया’, जिस पर पूरा गांधी मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। यह दृश्य, एक ओर जहाँ राजनीतिक एकता और समर्थन का प्रतीक बना, वहीं दूसरी ओर नीतीश कुमार के लिए एक मजबूत संदेश भी। इस बार नीतीश के साथ डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा भी शपथ ली, जिनको खासतौर पर बीजेपी कोटे से चुना गया था।
गठबंधन की मजबूती, मंत्रिमंडल और आगे की राह
मैदान में शपथ के बाद मंत्रिमंडल का भी गठन हुआ, जिसमें सहयोगी दलों से कुल 26 मंत्रियों ने शपथ ली — इनमें 3 महिलाएं, 3 नए चेहरे और एक मुस्लिम मंत्री भी शामिल रहे। यह मंत्रिमंडल नि:संदेह सामाजिक समीकरणों और राजनीतिक संतुलन का उदाहरण है।
नीतीश कुमार की यात्रा: संघर्ष, वापसी और रिकॉर्ड
नीतीश कुमार की मुख्यमंत्री की यह 10वीं पारी है — पहला कार्यकाल 2000 में मात्र 8 दिनों का रहा, 2005 से 2014 का लंबा दौर, फिर राजनीतिक उठा-पटक, इस्तीफे और वापसी। वह अब तक सबसे लंबे समय तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे हैं, और नए इतिहास के करीब हैं।
जनमानस में उत्साह, विपक्ष की चालें
इस ऐतिहासिक घड़ी में समर्थकों की भीड़, पटना की सड़कों पर जश्न, ढोल-नगाड़े, मिठाइयों की बौछार — साक्षात ‘लोकतंत्र का पर्व’ दिखाई दिया। विपक्ष के बीच यह चर्चा जरूर रही कि क्या सत्ता का यह समीकरण लम्बा टिकेगा, लेकिन फिलहाल नीतीश कुमार के अनुभव, उनकी राजनीतिक दूरदर्शिता और जनविश्वास का डंका बज रहा है।
