
Bhagalpur… जिसे “सिल्क सिटी” कहा जाता है।
जहां के रेशम की चमक देश ही नहीं, विदेशों तक अपनी पहचान बना चुकी है।
लेकिन अब यही शहर एक बड़े आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। वजह है Vikramshila Setu का क्षतिग्रस्त होना, जिसने पूरे सिल्क उद्योग की रफ्तार को थाम दिया है।
पूर्वी बिहार की लाइफलाइन माने जाने वाले विक्रमशिला सेतु के एक हिस्से के 4 मई 2026 को गंगा में गिरने के बाद पुल पर यातायात रोक दिया गया। प्रशासन ने जांच और मरम्मत का काम शुरू कर दिया है, लेकिन इसका असर अब सीधे भागलपुर के सिल्क कारोबार पर दिखने लगा है।
सिल्क उद्योग की सप्लाई चेन पर बड़ा असर
भागलपुर का सिल्क उद्योग पूरी तरह ट्रांसपोर्ट नेटवर्क पर निर्भर है।
नेपाल और उत्तर बिहार से आने वाला सिल्क धागा पहले सीधे भागलपुर पहुंचता था। रोजाना 2 से 3 ट्रक धागे की सप्लाई होती थी, लेकिन पुल बंद होने के बाद ट्रांसपोर्टरों को लंबा वैकल्पिक रास्ता लेना पड़ रहा है।
इस वजह से सबसे ज्यादा असर तसर सिल्क पर पड़ा है। कारोबारियों के मुताबिक तसर सिल्क धागे की कीमत में करीब 80 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हो चुकी है।
यानी अब सिल्क साड़ी, दुपट्टा, कुर्ता और अन्य फैब्रिक की कीमतें भी बढ़ने लगी हैं।
150 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर
सिल्क कारोबारियों का कहना है कि पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद अब माल ढुलाई के लिए 150 से 160 किलोमीटर तक अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।
इससे ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ गया है और समय भी ज्यादा लग रहा है।
पहले जहां माल समय पर पहुंच जाता था, अब डिलीवरी को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।
इसी कारण कई छोटे व्यापारी नए ऑर्डर लेने से बच रहे हैं।
छोटे बुनकरों पर सबसे बड़ी मार
भागलपुर का सिल्क उद्योग सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की रोजी-रोटी का आधार है।
शहर के कई मोहल्लों में आज भी करघों की आवाज से जिंदगी चलती है।
लेकिन अब कई जगह करघों की रफ्तार धीमी पड़ने लगी है।
एक तरफ धागा महंगा हो गया है, दूसरी तरफ ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ गई है।
ऐसे में छोटे बुनकरों और स्थानीय व्यापारियों के लिए काम जारी रखना मुश्किल होता जा रहा है।
शादी के सीजन में बढ़ी चिंता
यह समय शादी-विवाह के सीजन का है, जब सिल्क कपड़ों की मांग सबसे ज्यादा रहती है।
लेकिन इसी दौरान उत्पादन और सप्लाई दोनों प्रभावित हो गए हैं।
कारोबारियों का दावा है कि पुल क्षतिग्रस्त होने से रोजाना 20 से 30 करोड़ रुपये तक का कारोबार प्रभावित हो रहा है।
सिर्फ सिल्क उद्योग ही नहीं, बल्कि ढाबे, लाइन होटल, ट्रांसपोर्ट और छोटे दुकानदारों का काम भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
पहले भी उठ चुके थे सवाल
रिपोर्ट्स के मुताबिक विक्रमशिला सेतु की जर्जर स्थिति को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठाए गए थे।
मार्च 2026 में पुल के कुछ हिस्सों और सुरक्षा दीवारों के क्षतिग्रस्त होने की खबरें सामने आई थीं।
लेकिन समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए।
अब इसका नुकसान सिर्फ एक पुल तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है।
सरकार की कार्रवाई जारी
राज्य सरकार ने पुल की मरम्मत का काम तेज कर दिया है।
मुख्यमंत्री ने हवाई सर्वे किया है, जबकि आईआईटी विशेषज्ञों की टीम जांच में जुटी हुई है।
प्रशासन का दावा है कि जल्द ही हल्के वाहनों की आवाजाही शुरू की जा सकती है।
लेकिन तब तक भागलपुर का सिल्क उद्योग इंतजार में है।
बुनकर इंतजार में हैं।
व्यापारी इंतजार में हैं।
क्योंकि भागलपुर के लिए विक्रमशिला सेतु सिर्फ एक पुल नहीं था, बल्कि व्यापार की सबसे बड़ी सांस था।
और जब ऐसी लाइफलाइन रुकती है, तो असर सिर्फ रास्तों पर नहीं, बल्कि हजारों लोगों की जिंदगी पर पड़ता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इंफ्रास्ट्रक्चर की अनदेखी का खामियाजा आम लोगों को कब तक भुगतना पड़ेगा?
