बिहार विधानसभा चुनाव में : कुछ लोग तेजस्वी यादव और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का समर्थन कर रहे हैं, यह दावा करते हुए कि वे जनता की पसंद हैं और महागठबंधन (RJD के नेतृत्व में) सरकार बना सकता है।
दूसरी ओर, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA), खासकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU), को भी मजबूत माना जा रहा है। कुछ पोस्ट्स का कहना है कि BJP का वोट शेयर 30% से ऊपर जा सकता है, और JDU व चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी के साथ मिलकर NDA फिर से सरकार बना सकता है।
यह भी चर्चा है कि नीतीश कुमार को उपराष्ट्रपति बनाया जा सकता है, जिससे BJP अपना मुख्यमंत्री ला सकती है।

पिछले 2020 के चुनाव में NDA ने जीत हासिल की थी, और नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने, हालांकि उन्होंने 2022 में महागठबंधन के साथ और 2024 में फिर NDA के साथ गठबंधन किया। अभी NDA और महागठबंधन दोनों मजबूत दिख रहे हैं। चुनाव नजदीक आने पर प्रचार और मतदान के रुझान से स्थिति और स्पष्ट होगी।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए महागठबंधन
सामाजिक समीकरणों पर जोर: महागठबंधन सामाजिक और आर्थिक न्याय को केंद्र में रखकर रणनीति बना रहा है। खासकर यादव-मुस्लिम (M-Y) समीकरण के साथ-साथ EBC (अति पिछड़ा वर्ग), महादलित, और सवर्ण समुदायों से भी समर्थन जुटाने की कोशिश है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इस बार महागठबंधन को इन समुदायों से अच्छा समर्थन मिल सकता है, जिससे 42% वोट शेयर के साथ 150+ सीटें हासिल हो सकती हैं।
मुख्य मुद्दों पर फोकस: महागठबंधन के प्रमुख मुद्दे गरीबी उन्मूलन, रोजगार सृजन, पलायन रोकना, और सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक भागीदारी को बढ़ावा देना हैं। इसके अलावा, शिक्षा, महंगाई, कानून व्यवस्था, और किसान कल्याण जैसे मुद्दों को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
आर्थिक वादे: कांग्रेस ने महागठबंधन की सरकार बनने पर हर महिला को 2500 रुपये प्रतिमाह देने का वादा किया है, जो कर्नाटक मॉडल से प्रेरित है। यह वादा खासकर ग्रामीण और निम्न-आय वर्ग की महिलाओं को आकर्षित करने के लिए है।
वोटर लिस्ट विवाद पर आक्रामक रुख: महागठबंधन, खासकर RJD, ने चुनाव आयोग के विशेष गहन संशोधन (SIR) और वोटर लिस्ट से 52 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं। तेजस्वी यादव ने इसे गरीब और बहुजन मतदाताओं के मताधिकार को छीनने का प्रयास बताया है और इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन की रणनीति बनाई है।
तेजस्वी यादव का नेतृत्व: तेजस्वी यादव को महागठबंधन का मुख्य चेहरा माना जा रहा है, और उनकी आक्रामक रणनीति 2020 के प्रदर्शन पर आधारित है। वे सामाजिक मीडिया और जनसभाओं के जरिए NDA सरकार पर भ्रष्टाचार और जनविरोधी नीतियों का आरोप लगाकर जनता को लामबंद कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, तेजस्वी ने 71000 करोड़ के कथित घोटाले का मुद्दा उठाया, जिसे वे “ट्रिपल M” (मटन, मछली, मुसलमान) जैसे मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश बता रहे हैं।
गठबंधन में समन्वय और सीट बंटवारा: महागठबंधन सभी 243 सीटों पर एकजुट होकर लड़ने की रणनीति बना रहा है, लेकिन सीट बंटवारे को लेकर अंदरूनी खींचतान की आशंका है। RJD ने AIMIM को गठबंधन में शामिल करने से इनकार कर दिया, जिससे गठबंधन की रणनीति को और केंद्रित करने की कोशिश दिखती है।
नई पार्टियों का प्रभाव कम करना: प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी और AAP के सभी 243 सीटों पर अकेले लड़ने के ऐलान से महागठबंधन सतर्क है। वे इन पार्टियों के प्रभाव को कम करने के लिए स्थानीय मुद्दों और सामाजिक गठजोड़ पर ध्यान दे रहे हैं।
नीतीश-भाजपा विरोधी कैंपेन: महागठबंधन का मुख्य नारा “नीतीश-भाजपा हटाओ, बिहार बचाओ” है। तेजस्वी यादव के नेतृत्व में हुई बैठकों में NDA की जनविरोधी नीतियों को उजागर करने और बिहार को “बचाने” की रणनीति तैयार की गई है।
कुल मिलाकर, महागठबंधन की रणनीति सामाजिक समीकरणों, आर्थिक वादों, और NDA के खिलाफ आक्रामक प्रचार पर आधारित है। हालांकि, गठबंधन के अंदर सीट बंटवारे और नेतृत्व पर सहमति बनाना एक चुनौती हो सकती है।

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